कर्म और भाग्य- KARMA AUR BHAGYA
कर्म फल वर्णन कर्म और भाग्य – karma aur bhagya कर्म और भाग्य में कौन महत्वपूर्ण है यह विषय हमेशा से ही विवादित रहा है. कोई भाग्य को बड़ा बताता है तो कोई कर्म को. गोस्वामी तुलसीदासजी ने भी रामचरितमानस में लिखा है- कर्म प्रधान विश्व रचि राखा / जो जस करे
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